"घरेलू काम" या "फैक्ट्री हेल्प" के नाम पर उन्हें ऐसे स्थानों पर बुलाया जाता है जहाँ उनके आत्मसम्मान को खतरा हो सकता है。
इस शोषण को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं:
भारतीय समाज में "मजदूर की पत्नी" का संघर्ष अक्सर अदृश्य रहता है, विशेषकर जब वे आर्थिक तंगी के कारण बाहर काम खोजने निकलती हैं। "काम देने के बहाने" होने वाला शोषण एक गंभीर सामाजिक समस्या है जो विश्वासघात और असुरक्षा की भावना को जन्म देती है। Desi Majdur Ki Patni Ke Sath Kaam Dene Ke Bahan...
कई बार पूरे दिन की कड़ी मेहनत के बाद भी उन्हें तयशुदा पगार नहीं दी जाती。
असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को कई तरह के छलावे का सामना करना पड़ता है: 2013 जैसे कानून बनाए हैं
मजदूर परिवारों में आय के सीमित स्रोत होने के कारण अक्सर महिलाओं को भी काम करना पड़ता है。 जब पति बीमार हो या काम न मिल रहा हो, तो घर की पूरी जिम्मेदारी पत्नी के कंधों पर आ जाती है。 इस मजबूरी का फायदा उठाकर समाज के कुछ असामाजिक तत्व "काम देने के बहाने" उन्हें बुलाते हैं, जो अक्सर मानसिक या शारीरिक शोषण का रूप ले लेता है。
प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों की पत्नियाँ अक्सर कानूनी अधिकारों से अनभिज्ञ होती हैं。 हालाँकि सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 जैसे कानून बनाए हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और "लोग क्या कहेंगे" के डर से ये महिलाएँ शिकायत दर्ज नहीं करा पातीं。 Desi Majdur Ki Patni Ke Sath Kaam Dene Ke Bahan...
मदद करने का दिखावा कर कुछ लोग उनसे अधिक काम लेते हैं या उन्हें कर्ज के जाल में फँसा देते हैं。