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इस वीडियो का सार यही है कि यदि आप अपने चरित्र को बचाए रखें, समय का सदुपयोग करें और ईश्वर के चरणों से जुड़े रहें, तो जीवन कभी बर्बाद नहीं होगा।

ठाकुर जी के अनुसार, ईश्वर से विमुख होना ही अशांति की जड़ है। जब जीवन में आध्यात्मिकता नहीं होती, तो इंसान भौतिक सुखों के पीछे भागकर अपना मानसिक सुकून खो देता है।

जब व्यक्ति के भीतर 'मैं' का भाव आ जाता है और वह खुद को सबसे ऊपर समझने लगता है, तो उसका पतन निश्चित है। अहंकार इंसान को सीखने और सुधरने से रोकता है।

जीवन तब बर्बाद होने लगता है जब हम अपनी संस्कृति और माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कारों को भूल जाते हैं। अनुशासनहीन जीवन और बड़ों का अनादर व्यक्ति को सही रास्ते से भटका देता है। 3. नशा और व्यसन (Addictions)

2. संस्कारों का अभाव (Lack of Values)

शराब, जुआ या अन्य किसी भी प्रकार का नशा न केवल शरीर को बल्कि पूरे परिवार और भविष्य को नष्ट कर देता है। ठाकुर जी इसे जीवन की बर्बादी का सबसे बड़ा द्वार मानते हैं। 4. अहंकार (Ego)

महाराज जी अक्सर कहते हैं कि इंसान वैसा ही बनता है जैसी उसकी सोहबत होती है। गलत दोस्तों या नकारात्मक लोगों के साथ रहने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, जो अंततः पतन का कारण बनती है।